इबादत क्या है मैं ना जानू

इबादत क्या है मैं ना जानू
मैं जानू क्या है मुहब्बत
बारिश की बूंदों की तरह
जमी को भिगोने की हसरत

भीग जाए एक बार जो कोई
वो पा जाए प्यार जैसे 
बूंदों ने जो सोचा था 
तन भीगे मन भीगे कैसे

भीगे बिना अधूरी ज़मीं
अधूरा रह जाए ये आसमां
तर हो जाए एक बार बस 
तो खूबसूरत है ये समा 



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