मेरा रहने दो
क्यों हर लम्हा ,
तुम मेरी ही रहो में आते हो?
क्यों हर दफा,
तुम मुझपे ही उंगली उठाते हो?
मेरा आशियाँ है ये,
मुझे रहने दो।
मेरा सिलसिला है ये,
मुझे सहने दो।
मेरा जहां है ,
मेरा रहने दो।
मेरा तरीका एक कोशिश है| मेने हर चौराहे पर खुद की सोच को दूसरों से अलैदा ही रखा| पता नहीं क्यों.........| मेरा तरीका एक कोशिश है खुद को परखने की| कामयाबी जितनी देर से मिले उतना ही अच्छा है| वो क्या है के कई बार मंज़िल पर पहुंच कर मालूम होता है कितने अकेले हैं हम| मंज़िलों से अच्छे तो सफर और उसके राही होते हैं|
Comments
Post a Comment