बाबा की खोई हुई दुआएं

वो स्टेशन से दूर एक मजार के पास बैठा था। उसकी आंखे आज भी नीली ही थीं। लोग उसे बाबा बुलाते थे। लोग उसके पास अक्सर बैठ कर अपने दुख दर्द सुनाते थे। वो कुछ नहीं कहता था। केवल ऊपर आंखे करके दुआ करता। लोग कहते थे कि उसकी दुआएं काम आती हैं। वो कई बार अपने अतीत को याद करने की कोशिश करता था लेकिन उसे कुछ याद ना था। वो कौन है और कहां से आया है ? उस कुछ याद नहीं था। उस एक नाम बार बार सुनाई देता था रक। ये नाम और एक इंसान दिखता था जो उसे बाबा से बार बार कहता के वक्त हो चला है। तुम्हे बादल को बुलाना है होगा। बदल की रूह तुम्हारे साथ ही रहती है।उसे बुला लो। 

सादिक अपने घर में बच्चो के साथ खेल रहा था शाम का वक्त था।सनी भी अपने घर में लेटा गाने खेल रहा था किताबें साइड में पढ़ी थी। सनी आईएएस बनने किंतायारी कर रहा था। विनोद सब्जी लेकर आ रहा था । वो साइकिल से सब्जी का थैला उतरता है और साइकिल को कंधे पर रखकर सीढ़ियां चढ़ने लगता है। इसने में बिल्डिंग के बाहर एक गाड़ी रुकती है जिसमे नकाबपोश गुंडे होते हैं। विनोद उन्हें देखलेता है और साइकिल दिल कर भागने लगता है। भागते भागते वो सादिक और सॉन्नी कोनावाज लगता है तो दोनों अपने कमरे से बाहर निकलकर देखते हैं के गुंडे विनोद का पीछा कर रहें है। सादिक जल्दी ताला उठता है और अपने बीबी बच्चो को बंद कर देता है। सनी तब तक नीचे भाग जाता है। सादिक भी नीचे भागता है और दोनों वाह गुंडों के हाथों पकड़े जाते हैं।

तीनों को बहुत मारा जाता है। नकाबपोश गुंडे उन्हें मारकर मजार के पास फेंक जाते हैं। 
सादिक के घर का ताला तोड़ मुहल्ले वाले सादिक भाई के परिवार को निकालते हैं। बिल्डिंग के लोग परेशान है जाते है। कोई कुछ नहीं कर सकते था। सब डर गए थे। सादिक विनोद के घर वाले उन्हें ढूंडने निकालते है लेकिन रात भर कोई कहीं नहीं मिलता।
सवेरे सादिक विनोद और सनी तीनों बाबा कि मजार में जागते है। पहले विनोद उठता है और देखता है उसके एक भी घाव नहीं है। वो बाबा को देखता है और कुछ घरा उठता है। वो बाबा से कहता है के क्या ये कोई सपना है? बाबा कहते हैं नहीं ये हकीकत है। तुम्हे कुछ नहीं हुआ है घबराओ मत। अपने दोस्तों को जगाओ। विनोद सादिक की ओर देखता है उसके भी जख्म भर गए हैं और सनी के भी बस कपड़े ही गंदे है रात के खून में । विनोद डरता हुआ दोनों को उठाता है। तीनों एक दोस्त को देखते हैं। सनी वहां से यह सोच कर चला जाता है के ये सब कोई हवा का चक्कर है। विनोद और सादिक एक दोस्त से कहते हैं चलो घर चले। बाबा दोनों से कहते हैं देखो ये कोई ख्वाब नहीं है ना ही कोई काला जादू। में भी कोई जादूगर नहीं हूं। कल रात तुम तीनों मरने की हालात में थे। मैने दुआ की। फरिश्तों ने मेरे कान में दुआ पढ़ी। में भी वही बोलता गया जो मुझे कान में सुनाई दिया और तुम तीनों ठीक हो गए। तुम लोगों को अब यहां नहीं रुकना चाहिए कहीं भाग जाओ।वो लोग खतरनाक है तुम्हारा कुछ बिगड़ देंगे तो जिंदगी भर कहां जाओगे?
विनोद कहता है पता नहीं एक अजीब सी हिम्मत आ गई है अब तो उनसे लड़ना ही पड़ेगा।सादिक कहता है में घर जा रहा हूं।घर वाले परेशान होंगे ओर उधडे हुए कपड़ों में सादिक चल देता है। 
विनोद बाबा से कहता है केंबबा आपकी बात का यकीन तो नहीं है मुझे लेकिन अगर आपकी दुआएं काम आती है तो दुआ करिए के हम दुश्मन से जीत जाएं।इतना कहकर विनोद चल देता है।

दोपहर में तीनों अपनी छत पर मिलते है। सनी को बुखार हो गया था वो घबराया हुआ था। सादिक इस चिंता में था के आगे क्या होगा। विनोद दोनों से कहता है के अदालत ने अगली तारीख कब की है पता करो। सादिक कहता वो तो वकील साहब को पता होगा लेकिन अब पिटने के लिए वहां जाएगा कोन। सैनी कहता में तो नहीं जाने वाला। जान है तो जहान है। मेरा सिर फूटा हुआ था हाथ टूट गया था। दर्द के मरे बुरी हालत थी। सादिक कहता है के बाबा ने ऐसा किया क्या यार, सब छोड़ो पहले ये बताओ ये बाबा क्या चीज है। विनोंड कहता है कि वो सुबह से बाबा के बारे में ही सबके पूछ ताछ कर रहा है, ये बाबा इस बिल्डिंग के बनने से पहले से ही यहां रहते है। किसी को नहीं पता कहां से आए है कोन है और कहां के रहने वाले है।
तीनों एक दोस्त को देखते है। विनोद कहता है चलो बाबा से ही पूछ लेते हैं चलके के वो है कोन।सनी कहता है के उसे डर लग रहा है लेकिन सादिक उसे जबरदस्ती ले जाता है।

तीनों बाबा के पास बैठे होते हैं। बाबा कहते हैं देखो तुम जो पूछ रहे हो वो मुझे भी नहीं पता कैसे हुआ। मेरे कान में कुछ आवाजें आयी। कोई बोला के बाहर जाओ में बाहर गया वहां पेड़ के पास गड्ढे में तुम तीनों पड़े थे। में घासीट कर तुम तीनों को अंदर लाया। तुम तीनों खून मे सने हुए थे और इस सनी की तो गर्दन टूटी पड़ी थी हाथ टूटा था।सनी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं ये बात सुनते ही। बाबा बताते है के आवाज़ ने उसके कान में दुआएं पड़ी। वहीं दुआएं बाबा भी बोलते रहे । विनोद बीच मे टोकते हुए बोलता है और हम ठीक हो गए ये आप हमे बता चुके हैं बाबा। अच्छा ये बताइए वो आवाज़ किसकी है। बाबा कहते हैं वो आवाज़ वो आवाज़ मुझे सुनी सुनि सी लगती है। जैसे कोई जानी पहचानी आवाज़ हो। लेकिन बेटा मेरी याददाश्त अब मेरे साथ नहीं है। मुझे कुछ याद नहीं है अपने बारे में। मुझे ये मजार याद है बस। सादिक पूछता है के बाबा आप कब से इस मजार पर हैं? बाबा बताते है करीब 200 साल से । ये बात सुनते ही सबकी आंखें बाहर आ जाती है। सनी कहता है बाबा लेकिन आपको देखकर नाही लगता के आप खुद 80साल के भी होंगे। मतलब उसके कम है होगी आपकी उम्र।बाबा बताते है के उनकी उमर नहीं बढ़ती। अब से 200 साल पहले आंग्रेज थे और रियासतें थी। बरेली रोहिलखंड कहलाता था और इस मजार पर वो रहते थे। तीनों बाबा की बातें सुनकर हैरत में पड़ जाएं है। बाबा कहते है के उनकी ये बातें समझना ज़रूरी नहीं। 
बाबा कहते है देखो मैने क्या किया ये ज़रूरी नहीं ज़रूरी इस वक्त है तुम सबकी और इस बिल्डिंग में रहने वाले सभी गरीबों के मकान वापस दिलवाना। तुम्हारे ऊपर वाले ने तुम तीनों को एक मौका दिया है किसी के काम आने का। रही मेरी दुआएं की बात तो मेरी दुआ तुम सबके साथ है। जाओ और जुल्म के खिलाफ लड़ाई लड़ो।

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