बूढ़े बाबा की कहानी
सादिक अपने घर से निकलता है कुछ जुगाड़ करने। हाथ में एक फाइल है जिसमे सादिक के घर के कागज के पुराने और नए दोनों कागज है। सादिक सीढ़ियां उतर कर सनी को आवाज़ देता है। सनी आता है तेजी से चलते हुए सादिक इशारा करता है के चलो। सनी जल्दी से विनोद को बुलाता है और तीनों पहुंचते हैं मजार। मजार के पीछे बैठ कर बात शुरू करते हैं। विनोद कहता है मैने कचहरी में जाके पता करा था सादिक भाई कागजों पे नाम तो उसिका लिखा है। सैनी कहता है नाम उसीका है लेकिन हमारे कागजों मे तो हमारा ही नाम है ना। सिदिक बीच में रोककर बोलता है देखो में दोनों कागज लाया हूं।ये देखो ये पुरानी रेजिस्ट्री इसमें मेरा नाम है। देखो सादिक खां वल्द अशफाक उल्ला खां। है!? फिर देखो ये नए पेपर की कॉपी है। यहां देखो किसका नाम है! कोई दानुश है और वालिद का नाम तो है है नहीं। सनी कहता है हमारी लाइफ के साथ मजाक हो रहा है।
सादिक कहता है, देखो अदालत में केस डाल दिया है कल तारीख है ये फाइल देखकर जज साब समझ जाएंगे के किसीने नाम बदला है। विनोद कहता है के जिसने भी नाम बदला है उसने जज खरीद लिया तो ? सनी कहता है के तो हम सब गए काम से। वापस से किराए के मकान में रहेंगे। हर महीने रेंट की चेपो। और क्या ? विनोद कहता है अगर जज खरीदा तो हम और बड़ी कोर्ट में जाएंगे। सादिक कहता है हां हम बाकी लोगों को भी साथ लेकर लखनऊ या दिल्ली तक लड़ेंगे। हमारे पास इस घर के अलावा और है ही क्या!? थोड़ी देर सब शांत हो जाते हैं।
इतने में मजार के पास बैठे बाबा हसने लगते हैं। सनी बाबा से कहता है ,अरे बाबा आप क्यों हस रहे हो? आपको समझ भी आया क्या बात चल रही है। सादिक और विनोद थोड़ा मुस्कुराते है।बाबा जवाब देते है के बेटा तुम तो लोग जो दिल्ली तक जाने की बात कर रहे थे , मुझे वो रंग दे बसंती फिल्म याद आ गई।
बूढ़े बाबा के मु से ये बात सुनकर तीनों दंग रह गए और हसने भी लगे। विनोद कहता है बाबा आप फिल्म देखते हो ? बाबा कहते हैं हां एक अच्छा आदमी आता था अब से 6साल पहले। रोज शाम को यहीं मजार पे बैठ के फिल्म देखता था। उसके साथ साथ बैठे बैठे मैने रंग दे बसंती, ,,1942 लव स्टोरी, और वो रॉकस्टार ये सब देखी।
सादिक भाई कहते वाह भाई आप तो बाबा बड़े स्मार्ट हो। क्या उम्र होगी आपकी ? बाबा हस्ते हुए कहते हैं कि बेटा मेरी उम्र छोड़ो तुम जिस परेशानी में हो उसका हाल ढूंढो। जब तुम्हारा वकील अदालत में ये कागज देगा तो तुम कैसे जीत जाओगे। विनोद कहता है हां वही तो हम चाहते है। बाबा कहता है तब इसका मतलब तुम ये फाइल देने काल नहीं जा पा ओगे।
सादिक कहता है बाबा आपने डरा दिया हमें । लेकिन क्या सच में ऐसा होगा? बाबा बोलते है के शायद । नहीं भी हो सकता है। लेकिन तुम खुद ही सोचो के तुम्हे इतनी आसानी से कोई कब्जा करने वाला केस जीतने देगा? क्या नाम बताया था तुमने उसका दनुश ना । वो दनुष तुम्हे ये फाइल कोर्ट में ले जाने नहीं देगा। ये मुझे लगता है।
तीनों बाबा कि बातें सुन तो लेते है लेकिन मानते नहीं और अगले दिन कोर्ट में तीनों जाते है। फाइल सादिक विनोद के हाथ में थमा देता है। विनोद फाइल सनी को से देता है। लेकिन सनी तुरंत विनोद को फाइल फिर वापस दे देता है। विनोद कहता है ये क्या कर रहे है हम। डर क्यों रहे हो ? तीनों जैसे ही कचहरी में अंदर जाते है दो तीन मिनट में ही वो नज़रों में आ जाते है और उन पर हमला होता है। विनोद की पिटाई होती है फाइल छीन ली जाती है और जला दी जाती है। सनी को दबोच लिया जाता है और पीटा जाता है और सादिक भाई तो लोगों को देखते ही भाग लिए थे अंदर कोर्ट में ।
कोर्ट में अंदर जाते हैं तो सादिक भाई देखते है कि जज और दोनों वकील आपस में बातें कर रहे हैं। एक वकील मुस्कुराकर पूछता है लो कागज लाए हो जमीन के। सादिक घबराया हुआ होता है और अपनी शर्ट के अंदर से छुपे हुए कागज निकालता है।ये देख दूसरा वकील बहुत गुस्से में आ जाता है लेकिन जज साहब के सामने वो कुछ नहीं कहता। कुछ देर बाद सादिक बाहर आता है तो देखता है कुछ गुंडे खड़े है और वहीं सादिक की भी पिटाई होती है।
शाम को मजार के पास तीनों मिलते है और बाबा को दिन भर का हाल बताते हैं। बाबा के चेहरे पे मुस्कान थी। कहते है के तुम लोग अभी भी मान जाओ। वो लोग खतरनाक है। यहां से चले जाओ और कहीं और कुछ दिन रेहलो। लेकिन इस समय चोट खाने के बाद भी तीनों बाबा की नहीं सुनते।
Comments
Post a Comment