चाय की दुकान
चाय की दुकान पर जाना अच्छा होता है | पांच रुपये की चाय के बदले बैठने की एक जगह, ख़बरों को पढ़ने के लिए अखबार और तमाम मसलों पर बात करने के लिए चाचा ताऊ की बैठक मिल जाती है | आज कल घरों में अखबारों की ख़बरें कोने में रद्दी बनकर पड़ी रहती है | सबको पता है के कुछ ग़लत चल रहा है | पर सब न जाने क्यों चुप बैठे हैं |चाय पिलाते हुए बात उठी के अब के गानों में वो बात नहीं रही | आल इंडिया रेडियो पर पुराना गाना चल रहा था, पल भर के लिए कोई हमें प्यार कर ले ... झूठा ही सही | गाने की कशिश ने बात दबा दी | बात तो अखबार से ही निकलनी थी | अखबार की बातें लम्बी चलती हैं | टीवी और इंटरनेट की बातें जल्दी धुंदली पड़ जाती है क्योंकि वहां हर लम्हा एक नयी खबर अपनी जगह बना लेती है | लोगों ने इस सीधी बात को साबित करने के लिए शोध कर डाले | किसी ने माना नहीं होगा | सही बात को साबित करना हो तो जादा सबूत पेश करने पड़ते हैं | एक छोटी सी चुभन सबको रहती है, के कोई इतना साफ़ कैसे हो सकता है ? हरिशंकर परसाई के एक निठल्ले किरदार ने जब लोगों की यों ही मदत करना चाही तो लोगों ने इंकार कर दिया था | कवि की नज़र से ये लफ्ज़ खा जाने का काम करते हैं ,
देखो तुम्हारी चुन्नी कितनी साफ़ है
इतना साफ़ हो भी आज कल पाप है
एक ऑटो वाले भाई ने अखबार की एक खबर पढ़ डाली, दुसरे महाशय ने खबर की सारी बारीकियां समझा डाली और तीसरे ने अपनी राय भी रख दी | चाय के घूँट अंदर गए तो इलज़ाम मढ़ना शुरू हुआ | किसी को तो इलज़ाम की ज़िम्मेदारी देनी ही पड़ती है | इस दुकान पर लोग कम से कम देश को खराब नहीं बोलते | मैकडोनाल्ड में तो सीधे लोग देश को ही ज़िम्मेदार मानते हैं | इंडिया इज़ फुल ऑफ़ करप्शन, नो वन कैन लिव लाइक या.. ..|
इतने में एक पागल सा आदमी आया और निचे ज़मीन पर चुप चाप बैठ गया | किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया और बदले में उसने भी | एक पिलास्टिक का कप निकाल कर चाय वाले भाई ने उसको चाय दे दी | साथ में मट्ठी भी दी | उस पागल को देख कर लगा के इसके कपडे कितने गंदे हैं, उतने जितने के इस देश में नेताओं के होने चाहिए | पर जो होना चाहिए वो है नहीं | क्योंकि होना चाइये वाला हो गया तो सही हो जायेगा न और सही बात को साबित करना हो तो जादा सबूत पेश करने पड़ते हैं | अगर किसी को साबित करना हो के वो पागल है तो बस इतना करना है के कपडे मैले कर लो | वो पागल पिलास्टिक के कप में चाय पीता रहा | एक और महाशय आये | अपनी बड़ी गाड़ी से उतरे और अंगड़ाई ली | चाय वाले भाई से बोले, "भाई एक चाय देना चीनी कम पत्ती जादा स्पेशल वाली और पिलास्टिक के कप में देना |"
वो क्या है न के शीशे का ग्लास साफ़ होता है. उसमे प्लास्टिक के केमिकल नहीं होते, मैगी वाला हानिकारक सीसा नहीं होता और कोला वाले पेस्टिसाइड भी नहीं होते | इतना साफ़ होता है शीशा?!! कैसे मान ले ? जादा साफ़ होना भी पाप है |
इतना साफ़ हो भी आज कल पाप है
एक ऑटो वाले भाई ने अखबार की एक खबर पढ़ डाली, दुसरे महाशय ने खबर की सारी बारीकियां समझा डाली और तीसरे ने अपनी राय भी रख दी | चाय के घूँट अंदर गए तो इलज़ाम मढ़ना शुरू हुआ | किसी को तो इलज़ाम की ज़िम्मेदारी देनी ही पड़ती है | इस दुकान पर लोग कम से कम देश को खराब नहीं बोलते | मैकडोनाल्ड में तो सीधे लोग देश को ही ज़िम्मेदार मानते हैं | इंडिया इज़ फुल ऑफ़ करप्शन, नो वन कैन लिव लाइक या.. ..|
इतने में एक पागल सा आदमी आया और निचे ज़मीन पर चुप चाप बैठ गया | किसी ने उस पर ध्यान नहीं दिया और बदले में उसने भी | एक पिलास्टिक का कप निकाल कर चाय वाले भाई ने उसको चाय दे दी | साथ में मट्ठी भी दी | उस पागल को देख कर लगा के इसके कपडे कितने गंदे हैं, उतने जितने के इस देश में नेताओं के होने चाहिए | पर जो होना चाहिए वो है नहीं | क्योंकि होना चाइये वाला हो गया तो सही हो जायेगा न और सही बात को साबित करना हो तो जादा सबूत पेश करने पड़ते हैं | अगर किसी को साबित करना हो के वो पागल है तो बस इतना करना है के कपडे मैले कर लो | वो पागल पिलास्टिक के कप में चाय पीता रहा | एक और महाशय आये | अपनी बड़ी गाड़ी से उतरे और अंगड़ाई ली | चाय वाले भाई से बोले, "भाई एक चाय देना चीनी कम पत्ती जादा स्पेशल वाली और पिलास्टिक के कप में देना |"
वो क्या है न के शीशे का ग्लास साफ़ होता है. उसमे प्लास्टिक के केमिकल नहीं होते, मैगी वाला हानिकारक सीसा नहीं होता और कोला वाले पेस्टिसाइड भी नहीं होते | इतना साफ़ होता है शीशा?!! कैसे मान ले ? जादा साफ़ होना भी पाप है |
paap ko to nhi pta,.... lekin agr zyada saaf hoge to log apko ganda karne me zarur lag jayege
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