नोटिस

सादिक अपने कमरे में बीबी बच्चो के साथ बैठा था के अचानक उसके पास कॉल आता है। बच्चे को गोद से उतारकर वो तहमद बांधता है और कमरे से बाहर निकल नीचे कोई पार्सल लेने जाता है। सादिक ने बहुत मेहनत के पैसे जोड़ कर ये एक कमरे का घर खरीदा है। कई सालों की मेहनत के बाद उसे अपनी बीबी और छोटे से बच्चे के लिए एक छत मिल पाई। इस बिल्डिंग में और भी लोग रहते हैं लेकिन अधिकतर किराए दार हैं। शहर से दूर इस जगह रहेगा भी कौन। सादिक देखता है पार्सल वाला कोई पार्सल नहीं, डाक वाला नोटिस लाया है।
डाक वाला नोटिस हाथ में दे कर साइन करवालेता है और पूछता है ये विनोद कुमार और सनी शर्मा कहां रहते हैं। सादिक पहले ही नोटिस को देखकर कुछ समझ नहीं पाया था उसे लगा कोई मुसीबत तो है ही लेकिन जब विनोद और सनी का नोटिस देखा तो कुछ हल्का महसूस किया और दोनों का नाम वहीं नीचे से चीखना शुरू कर दिया। दोनों अपने अपने घर से चप्पल पहने निकले चले आए। दोनों ने नोटिस लिए और साइन कर दिए और डाक वाले से पूछा इसमें है क्या? कोई सरकारी नोटिस है भय्यिया मुझे क्या पता अंदर क्या है। इतना कह कर वह तीनों को असमंजस में छोड़ कर डाकिया अपनी साइकिल पर बैठा और चल दिया। 

ये 2020 था जब हरियाणा ने किसान और संसद में नेता डांस कर रहे थे तब बरेली में दनुश ने अपना साम्राज्य बनाना शुरू कर दिया था। धनुष एक बड़े से आश्रम में अकेला रहता था। पूरे आश्रम की साफ सफाई अकेले करता और अध्यात्म की खोज करने के लिए ध्यान लगता था। शाम को आश्रम में माइक लगाकर लोगो को उपदेश देता ता। एक योगी की भेष भूषा में वह ज्ञानी था। हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू तीनों भाषाएं बोलता समझता था। उसके आश्रम के कभी कभी लोग आते और कुछ देर में बात करके निकाल जाते। बाहर किसी को नहीं पता था के कोन आता है कोन जाता है। धनुष ने अपने सबसे करीबी भरोसेमंद आदमी को बुलाया था। उसका नाम था भरत। भारत को बुलाकर दनुष ने पूछा काम कैसा चल रहा है। कितने पैसे इक्कठे हुए। भरत कहता है अभी थोड़ा समय लगेगा गुरुजी हमने कुछ ज़मीनो के कागज हथियाए है उन्हें बेचकर हमारा काम हो जाएगा। थोड़ा टाइम दीजिए मुझे बस। दानुश कहता ठीक है और महरिमी के बारे में पूछता है। भरत थोड़ा हिचकिचाते हुए बोलता है आपकी बेटी एक हम ठीक है गुरुजी। बस वो आज कल थोड़ा ज़ादा गुस्सा करने लगी है। दो लोग बहुत बुरी तरह घायल होंचुके हैं गुरुजी। दानुष भरत की बात सुन कर कुछ देर सोचता है और कहता है के में महारिम से आकर मिलूंगा। अब तुम जाओ। 

वहां कॉलोनी में सभी मकान मालिक इक्कठे थे और मीडिया से बात चीत कर रहे थे। बड़े बूढ़े और माताएं रिपोर्टर को बता रहे थे जैसे उन्होंने ये मकान खरीदा। उन्हें सालों बिल्डरों ने परेशान किया। किसी लोन लेकर मकान खरीदा था तो किसीने जीवन भर की कमाई से। लोगों को समझ नहीं आ रहा था के क्या करे। कोई बड़ा आदमी कहता है के जमीन उसकी है। जिसे इन गरीबों ने ज़म्में खरीदी थी उसका मर्डर हो चुका है। सादिक मीडिया वाले से को समझा रहा था के लोग यहां रोड पर आ जाएंगे। कॉरोना के समय में ना काम ना धंदा जाएंगे तो जाएंगे कहां। विनोद और सनी छत से ये सब देख रहे थे। 

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