एक देश था

एक देश था। उम्दा देश। फिर वहां एक सरकार ने सालों लोगों को अनपढ़ बनाये रखा। ताकि देश के सरकारी ख़ज़ाने को लूटते रहे। जब सवाल करने की भाषा किसीको आती नही होगी तो कोई सवाल पूछेगा ही नहीं। क्योंकि काम नहीं किया था तो सरकार बनी नही रह पाई। दूरी सरकार आयी। उसने उन्ही लोगों को जो सालों से सही से पढ़ लिख नहीं पा रहे थे, धर्म के नाम पर बेबक़्कूफ बनाया। धर्म के साथ के अच्छी बात है के लोग ज़्यादा दिन इसके असर में नहीं रहते। बढ़ती संचार व्यवस्था के अपने फायदे हैं। पर जब मज़हबी बुखार उतरने लगा तो लोगो को एक नया शगूफा दिया गया। जो के दुनिया के किसी भी समय में किसी भी सरकार, संगठन या नेता ने आखीर में अपनाये हैं। जंग। सरहदों के नाम पर जंग। किताबें बताती हैं। खतरनाक मंज़र था जब इंसान इंसान को मार रहा था। दोनों ही दिशाओं से कोई कुर्बान हो रहा था। तो कोई विधवा। कोई आने बाप खो रहा था तो कोई बेटे को तो कोई भाई को।
ये सिर्फ एक कहानी है किसी देश की। असल जिंदगी से इसका कोई लेना देना नहीं है।

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