रमज़ान का पाक महीना है

 रमज़ान का पाक महीना है। तूने  कितने रखे ? मेने एक भी नहि।
पिछली बार जब तारिक  से मिला था तो इतनी ही बात हुई थी। दिन भर बस घूमना  ही उसका असली काम था। माँ बाप ने कभी पढ़ाई करने को कहा नहीं। बड़ा भाई जेल में था। तारिक को आवारगी चढ़ी थी। बिना बात के लोगों से झगड़ना उसका रोज़ का काम हो गया था । कहता था के वो आज भी गिरे हुए पैसे नहीं उठाता । मैंने चिचा से पूछा के तारिक के साथ के सब लड़के दीखते हैं तारिक नहीं दिखता ? चिचा हस दिए । मोहल्ले में बाहर से आया  एक आदमी अपनी बीबी  लेकर किराय पर रहता था । तारिक को उस आदमी की बीबी से प्यार हो गया है। पिछले हफ्ते तारिक ने उस आदमी को बहुत मारा उसकी बीबी को मारा और ऐलान किया के पुलिस को बुलाया जाये  हम जेल जाना चाहते हैं । पुलिस आई और तारिक को ले गई। जाते जाते कह भी गया के लौट के आएगा तो फिर मरेगा । 

चिचा ने तारिक की हिम्मत की तारीफ की । मैने चिचा को बताया के लड़कियों के मामलों में जो अंदर जाते हैं उनकी पिटाई बहुत होती है। चिचा ने चाय का प्याला भरा, मेरे हाथ में दिया । बीड़ी मु से निकली और बोले , उसे कोई नहीं मार पायेगा। उनकी इस बात को सुनकर मेरे कान लाल हो गए । देशभक्ति उमड़ पड़ी । मेने कहा कैसे? वो एक एक रोज़ा रख रिया है। रोज़े में कोई पुलिस वाला हाथ नहीं उठा सकता। ईद से पहले रिहा भी हो जायेगा पिटेगा कैसे।

तारिक़ की बातें मेरे दिमाग में घूमने लगि। गुस्सा भी आता, तरस भी आता और हसी भी ।  

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